✨ स्मार्ट प्रश्न-पत्र जनरेटर (कक्षा 9 - गंगा)
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PM Shri Kendriya Vidyalaya Chanderi
सत्रीय परीक्षा (सत्र: 2026-27)
कक्षा – 9वीं | विषय – हिंदी | पूर्णांक – 80
समय: 3 घंटे अधिकतम अंक: 80
1. सभी प्रश्न अनिवार्य हैं।
2. उत्तर स्पष्ट एवं शुद्ध हिंदी में लिखिए।
लेखन एक अद्भुत कला है। जब लेखक कलम उठाता है तो वह केवल शब्द नहीं लिखता — वह अपने मन की गहराइयों को उड़ेलता है। महान लेखकों ने कहा है कि लेखन आत्मा की अभिव्यक्ति है। परंतु हर व्यक्ति के लिए लिखना इतना आसान नहीं होता। कुछ लोग लिखते-लिखते रुक जाते हैं — विषय नहीं सूझता, शब्द नहीं मिलते। इसे 'राइटर्स ब्लॉक' कहते हैं। अच्छे लेखन के लिए तीन बातें आवश्यक हैं — पहली: विषय की गहरी समझ, दूसरी: भाषा पर अधिकार, और तीसरी: अभिव्यक्ति की इच्छाशक्ति। हिंदी साहित्य में निबंध-विधा का विशेष महत्त्व है क्योंकि यह लेखक के व्यक्तित्व को सीधे पाठक तक पहुँचाती है。
(i) बहुविकल्पीय प्रश्न : [1×3=3 अंक]
(क) 'राइटर्स ब्लॉक' का अर्थ है : (अ) लिखने की तेज़ गति (ब) लिखते समय विषय या शब्द न सूझना (स) लेखक का आलस्य
(ख) उत्तम लेखन के लिए किन बातों की आवश्यकता है? (अ) शिक्षा, धन और समय (ब) विषय की समझ, भाषा पर अधिकार, अभिव्यक्ति की इच्छा (स) कलम, कागज और प्रेरणा
(ग) निबंध-विधा का विशेष महत्त्व क्यों है? (अ) यह लेखक के व्यक्तित्व को सीधे पाठक तक पहुँचाती है (ब) यह सबसे सरल विधा है (स) इसमें कहानी होती है
(ii) लघूत्तरात्मक प्रश्न : [2×2=4 अंक]
(घ) 'केवल नियमों को जानना पर्याप्त नहीं' — गद्यांश के आधार पर तात्पर्य स्पष्ट कीजिए।
(ङ) लेखन को आत्मा की अभिव्यक्ति क्यों कहा जाता है?
(क) (ब) लिखते समय विषय या शब्द न सूझना
(ख) (ब) विषय की समझ, भाषा पर अधिकार, अभिव्यक्ति की इच्छा
(ग) (अ) यह लेखक के व्यक्तित्व को सीधे पाठक तक पहुँचाती है
(घ) लेखन के नियम जानना जरूरी है, किंतु उससे अधिक आवश्यक है अभिव्यक्ति की इच्छाशक्ति और भाव।
(ङ) लेखक बाहरी प्रक्रिया के साथ-साथ अपने भीतर की भावनाएँ, विचार और अनुभव शब्दों में उतारता है, इसलिए इसे आत्मा की अभिव्यक्ति कहते हैं।
शब्दों में जादू होता है, जो दिल की बात कह देते हैं।
कलम उठाओ, लिखना सीखो, जो मन में है वो बह जाते हैं।।
विचार हैं अनगिन मन में, उन्हें शब्दों में ढालो।
लिखते-लिखते राह मिलेगी, बस कलम को रोको न, पालो।।
(i) बहुविकल्पीय प्रश्न : [1×3=3 अंक]
(क) 'शब्दों में जादू होता है' — यहाँ कौन-सा अलंकार है? (अ) उपमा (ब) मानवीकरण (स) अनुप्रास
(ख) 'लिखते-लिखते राह मिलेगी' का क्या संदेश है? (अ) लगातार लिखने से ही सही दिशा और शैली मिलती है (ब) रास्ता मिल जाएगा (स) जल्दी लिखना चाहिए
(ग) विचार कहाँ होते हैं? (अ) किताबों में (ब) मन में (स) कलम में
(ii) लघूत्तरात्मक प्रश्न : [2×2=4 अंक]
(घ) 'विचार हैं अनगिन मन में, उन्हें शब्दों में ढालो' — इन पंक्तियों का भाव लिखिए。
(ङ) 'हर विधा में खुद को खोजो' — इसका क्या अर्थ है?
(क) (ब) मानवीकरण
(ख) (अ) लगातार लिखने से ही सही दिशा और शैली मिलती है
(ग) (ब) मन में
(घ) मन में हमेशा अनेक विचार होते हैं, उन्हें शब्दों में व्यक्त करना ही लेखन का उद्देश्य है।
(ङ) हर प्रकार के लेखन (कविता, कहानी, निबंध) में अपनी पहचान और अपना अनूठा व्यक्तित्व विकसित करो।
(i) उपसर्ग पहचानकर लिखिए : (1) प्रतिष्ठा (2) अनुभव (3) निर्गुण
(ii) प्रत्यय पहचानकर लिखिए : (1) लेखकीय (2) हँसाई
उपसर्ग: (1) प्रति (2) अनु (3) निर् | प्रत्यय: (1) ईय (2) आई
(1) बख्शी जी प्रसिद्ध निबंधकार थे。
(2) नमिता ने निबंध माँगा。
(3) वह शीघ्र लिखते थे。
(4) मेरा मन विचारों से भरा था。
(5) दो विषयों पर लिखना था。
(1) गुणवाचक विशेषण (2) व्यक्तिवाचक संज्ञा (3) कालवाचक क्रिया-विशेषण (4) पुरुषवाचक सर्वनाम (5) संख्यावाचक विशेषण
(1) बख्शी जी ने निबंध लिखा。
(2) क्या आप निबंध लिख सकते हैं?
(3) काश! मैं अच्छा निबंध लिख सकता。
(4) निबंध में मुख्य बात भाव है。
(5) यदि विषय सूझे तो निबंध लिखूँगा。
(1) विधानवाचक (2) प्रश्नवाचक (3) इच्छावाचक (4) विधानवाचक (5) संकेतवाचक
(1) 'माता का वह वात्सल्य-सा प्यार।'
(2) 'कनक कनक ते सौ गुनी।'
(3) 'चारू चंद्र की चंचल किरणें।'
(4) 'रहिमन पानी राखिए।'
(5) 'मुख मयंक-सा सुंदर है।'
(1) उपमा (2) यमक (3) अनुप्रास (4) श्लेष (5) उपमा
"मुझे आज लिखना ही पड़ेगा। अंग्रेजी के प्रसिद्ध निबंध-लेखक ए.जी. गार्डिनर का कथन है कि लिखने की एक विशेष मानसिक स्थिति होती है। उस समय मन में कुछ ऐसी उमंग-सी उठती है, हृदय में कुछ ऐसी स्फूर्ति-सी आती है कि लेख लिखना ही पड़ता है। उस समय विषय की चिंता नहीं रहती। कोई भी विषय हो, उसमें हम अपने हृदय के आवेग को भर ही देते हैं। हैट टाँगने के लिए कोई भी खूँटी काम दे सकती है।"
(1) ए.जी. गार्डिनर किस भाषा के निबंध-लेखक हैं? (अ) हिंदी (ब) फ्रेंच (स) अंग्रेजी
(2) 'हैट टाँगने की खूँटी' किसका प्रतीक है? (अ) लेखन के नियमों का (ब) विषय मात्र एक आधार है (स) टोपी का
(3) लेखक के अनुसार लेखन की सबसे अच्छी अवस्था कब होती है? (अ) जब मन में उमंग और स्फूर्ति हो (ब) जब विषय अच्छा हो (स) जब परीक्षा हो
(4) 'विषय की चिंता नहीं रहती' का अर्थ है? (अ) लेखक को विषय से मतलब नहीं (ब) भावावेग हो तो कोई भी विषय उपयुक्त होता है
(5) गद्यांश की भाषा-शैली क्या है? (अ) हास्य-व्यंग्यात्मक और आत्मपरक (ब) औपचारिक (स) कठिन
(1) स (2) ब (3) अ (4) ब (5) अ
वृद्धावस्था जीवन की वह संध्या है जब मनुष्य को सबसे अधिक साथ और सहारे की जरूरत होती है। परंतु आधुनिक जीवन की भागदौड़ में परिवार बिखरते जा रहे हैं। बच्चे पढ़-लिखकर शहरों में चले जाते हैं और बूढ़े माता-पिता अकेले घर में रह जाते हैं। यह एकाकीपन वृद्धों के लिए बहुत कष्टकारी होता है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह समस्या और भी गहरी है। हमें अपने बुजुर्गों को समय देना होगा, उनसे बात करनी होगी। उनका अनुभव और ममता हमारे लिए अमूल्य है。
(i) बहुविकल्पीय प्रश्न : [1×3=3 अंक]
(क) 'वृद्धावस्था जीवन की संध्या है' — यहाँ कौन-सा अलंकार है? (अ) उपमा (ब) रूपक (स) उत्प्रेक्षा
(ख) वृद्धों की मुख्य समस्या क्या बताई गई है? (अ) बीमारी (ब) एकाकीपन और सुनने वाले का न होना (स) पैसों की कमी
(ग) गाँव सूने क्यों हो रहे हैं? (अ) बाढ़ से (ब) युद्ध से (स) पलायन के कारण
(ii) लघूत्तरात्मक प्रश्न : [2×2=4 अंक]
(घ) 'पलायन' का वृद्धों पर क्या प्रभाव पड़ता है?
(ङ) हम अपने बुजुर्गों की मदद किस प्रकार कर सकते हैं?
(क) (ब) रूपक
(ख) (ब) एकाकीपन और सुनने वाले का न होना
(ग) (स) पलायन के कारण
(घ) पलायन से बुजुर्ग अकेले रह जाते हैं, उन्हें भावनात्मक साथ नहीं मिलता जिससे वे अवसाद का शिकार होते हैं।
(ङ) उन्हें समय देकर, बातचीत करके और परिवार का अभिन्न हिस्सा महसूस कराकर।
घर था भरा-पूरा कभी, बच्चों की किलकारी थी।
अब सूना आँगन रोता है, दीवारें भी उदास बेचारी थी।।
बूढ़ी माँ बैठी चुप-चाप, यादों की माला फेरती।
तोता जब बोले राम-राम, मन को थोड़ा सहारा मिले।
(i) बहुविकल्पीय प्रश्न : [1×3=3 अंक]
(क) 'सूना आँगन रोता है' में अलंकार है? (अ) उपमा (ब) मानवीकरण (स) यमक
(ख) बूढ़ी माँ क्या कर रही है? (अ) सो रही है (ब) यादों की माला फेरते हुए राह देख रही है (स) खाना बना रही है
(ग) तोता किसके प्रतीक के रूप में है? (अ) धर्म के (ब) एकाकीपन में साथ और सहारे के (स) कोलाहल के
(ii) लघूत्तरात्मक प्रश्न : [2×2=4 अंक]
(घ) 'घर था भरा-पूरा कभी' — इन पंक्तियों में कवि ने क्या दर्शाया है?
(ङ) कविता का मूल संदेश क्या है?
(क) (ब) मानवीकरण
(ख) (ब) यादों की माला फेरते हुए राह देख रही है
(ग) (ब) एकाकीपन में साथ और सहारे के
(घ) परिवार के बिखराव और पलायन के कारण घर का सूनापन और पीड़ा का चित्रण।
(ङ) बुजुर्ग एकाकी हो रहे हैं, उन्हें परिवार के स्नेह की जरूरत है। तोते जैसा छोटा साथ भी उनके जीने का सहारा बनता है।
(i) उपसर्ग पहचानकर लिखिए : (1) प्रतिकूल (2) विलग (3) अभाव
(ii) प्रत्यय पहचानकर लिखिए : (1) एकाकीपन (2) ग्रामीण
उपसर्ग: (1) प्रति (2) वि (3) अ | प्रत्यय: (1) पन (2) ईन
(1) ताई ने मिट्ठू को पाला था。
(2) वह प्यारा-सा तोता था。
(3) मिट्ठू तेज़ बोलता था。
(4) ताई को मिट्ठू की बहुत याद आती थी。
(5) वह उनका साथी था。
(1) व्यक्तिवाचक संज्ञा (2) गुणवाचक विशेषण (3) रीतिवाचक क्रिया-विशेषण (4) परिमाणवाचक क्रिया-विशेषण (5) पुरुषवाचक सर्वनाम
(1) ताई ने मिट्ठू को दाना दिया。
(2) क्या मिट्ठू बोल सकता है?
(3) काश! बेटे घर आ जाते。
(4) शोर मत करो, चुप रहो。
(5) यदि बेटे आते तो ताई खुश होतीं。
(1) विधानवाचक (2) प्रश्नवाचक (3) इच्छावाचक (4) आज्ञावाचक (5) संकेतवाचक
(1) 'ताई का घर सूने खंडहर-सा था।'
(2) 'मिट्ठू मानो ताई का पुत्र ही हो।'
(3) 'मधुर मधुर मिट्ठू की आवाज़।'
(4) 'सूना घर काटने को दौड़ता था।'
(5) 'रहिमन पानी राखिए।'
(1) उपमा (2) उत्प्रेक्षा (3) अनुप्रास (4) मानवीकरण (5) श्लेष
"गहरी साँस लेकर ताई कहतीं, 'भगवान! कैसे नैया पार लगेगी?' और बंद पिंजड़े में अपने पंखों को फड़फड़ाता, उछल-कूद मचाता मिट्ठू उत्तर देता, 'राम-राम कहो, सीताराम कहो।' ताई दुहरातीं — सीताराम! सीताराम! अब ये ही दो प्राणी गाँव के बीच में स्थित बड़े घर के उस सूने खंडहर में एक-दूसरे को सहारा देने के लिए रह गए थे।"
(1) ताई क्या कहकर आहें भरती थीं? (अ) 'राम-राम' (ब) 'भगवान! कैसे नैया पार लगेगी?' (स) 'बेटे कब आएँगे?'
(2) मिट्ठू ताई की बात का क्या उत्तर देता था? (अ) 'राम-राम कहो, सीताराम कहो' (ब) 'चुप रहो' (स) 'हाँ माँ'
(3) 'सूना खंडहर' किसका प्रतीक है? (अ) टूटे-फूटे घर का (ब) ताई के अकेलेपन और खाली जीवन का (स) गरीबी का
(4) ताई के घर को 'खंडहर' क्यों कहा गया? (अ) बाढ़ से टूट गया (ब) परिवार के सदस्य चले गए (स) मरम्मत नहीं हुई
(5) 'नैया पार लगाना' मुहावरे का अर्थ है : (अ) नाव चलाना (ब) जीवन संभालना, समस्या हल करना (स) नदी पार करना
(1) ब (2) अ (3) ब (4) ब (5) ब
संगीत मनुष्य की आत्मा की भाषा है। जब शब्द कम पड़ जाते हैं, तो संगीत बोलता है। भारतीय संगीत परंपरा में संगीत को ईश्वर की उपासना का माध्यम माना जाता है। किसी भी महान कलाकार के जीवन में उसके गुरु और परिवार की भूमिका अत्यंत महत्त्वपूर्ण होती है। लता मंगेशकर के संगीत जीवन में उनके पिता की छत्रछाया थी। मात्र पाँच वर्ष की आयु में पिता से संगीत सीखना और फिर जीवनपर्यंत उसे साधते रहना — यही उनकी महानता का रहस्य है। उन्होंने कभी कला से समझौता नहीं किया। उनकी आवाज़ में जो पवित्रता थी, वह उनकी साधना का फल थी।
(i) बहुविकल्पीय प्रश्न : [1×3=3 अंक]
(क) संगीत को किसकी भाषा कहा गया है? (अ) शरीर की (ब) आत्मा की (स) बुद्धि की
(ख) लता जी ने संगीत सीखना कब शुरू किया? (अ) पाँच वर्ष में (ब) दस वर्ष में (स) बारह वर्ष में
(ग) लता जी की आवाज़ में पवित्रता का कारण क्या था? (अ) धन (ब) साधना और कला से समझौता न करना (स) प्रसिद्धि
(ii) लघूत्तरात्मक प्रश्न : [2×2=4 अंक]
(घ) 'साधना' का जीवन में क्या महत्त्व है? गद्यांश के आधार पर लिखिए。
(ङ) कलाकार के विकास में परिवार की क्या भूमिका होती है?
(क) (ब) आत्मा की
(ख) (अ) पाँच वर्ष में
(ग) (ब) साधना और कला से समझौता न करना
(घ) साधना का अर्थ है निरंतर अभ्यास और समर्पण, इसी से विधा में पवित्रता और महानता आती है।
(ङ) परिवार प्रारंभिक प्रशिक्षण, संस्कार और प्रेरणा देता है, जो कलाकार की नींव बनती है।
सुर में जब डूबे सारी दुनिया, माँ सरस्वती प्रसन्न होती है।
आवाज़ की वो पावन धारा, कोटि हृदय को सींच देती है।।
पिता का आशीष, गुरु की दीक्षा, यही है कला की असली पूँजी।
लगन हो, साधना हो मन में, तभी बजती है वो बाँसुरी।।
(i) बहुविकल्पीय प्रश्न : [1×3=3 अंक]
(क) 'आवाज़ की पावन धारा' में अलंकार है? (अ) रूपक (ब) यमक (स) अनुप्रास
(ख) 'कला की असली पूँजी' किसे कहा गया है? (अ) धन को (ब) पिता के आशीष और गुरु की दीक्षा को (स) प्रसिद्धि को
(ग) 'बाँसुरी का बजना' किसका प्रतीक है? (अ) संगीत सीखने का (ब) सच्ची कला प्रकट होने का (स) कृष्ण का
(ii) लघूत्तरात्मक प्रश्न : [2×2=4 अंक]
(घ) 'पिता का आशीष, गुरु की दीक्षा' — इसमें किस परंपरा का उल्लेख है?
(ङ) साधना को 'असली पूँजी' क्यों कहा गया है?
(क) (अ) रूपक
(ख) (ब) पिता के आशीष और गुरु की दीक्षा को
(ग) (ब) सच्ची कला प्रकट होने का
(घ) गुरु-शिष्य परंपरा और पारिवारिक कला-विरासत का उल्लेख है।
(ङ) क्योंकि साधना अमूल्य है, धन से नहीं खरीदी जा सकती और जीवन भर काम आती है।
(i) उपसर्ग पहचानकर लिखिए : (1) संगीत (2) अभिनय (3) प्रसिद्ध
(ii) प्रत्यय पहचानकर लिखिए : (1) गायिका (2) संगीतकार
उपसर्ग: (1) सम् / सं (2) अभि (3) प्र | प्रत्यय: (1) इका (2) कार
(1) लता जी महान गायिका हैं。
(2) वे पाँच वर्ष में संगीत सीखने लगीं。
(3) लता जी मधुर स्वर में गाती हैं。
(4) उन्होंने कभी झुकना नहीं सीखा。
(5) लता जी बचपन से गाती थीं。
(1) गुणवाचक विशेषण (2) संख्यावाचक विशेषण (3) गुणवाचक विशेषण (4) पुरुषवाचक सर्वनाम (5) कालवाचक क्रिया-विशेषण
(1) लता जी ने गाना गाया。
(2) क्या लता जी आज गाएँगी?
(3) काश! मैं भी अच्छा गा सकता。
(4) सदा सच्ची साधना करते रहो。
(5) यदि लगन हो तो कला मिलती है。
(1) विधानवाचक (2) प्रश्नवाचक (3) इच्छावाचक (4) आज्ञावाचक (5) संकेतवाचक
(1) 'लता जी की आवाज़ मानो कोयल बोल रही हो।'
(2) 'सुर सुरीले सदा सुनाओ।'
(3) 'उनकी आवाज़ अमृत की धारा है।'
(4) 'मुख मयंक-सा सुंदर है।'
(5) 'रहिमन पानी राखिए।'
(1) उत्प्रेक्षा (2) अनुप्रास (3) रूपक (4) उपमा (5) श्लेष
"यतींद्र मिश्र : आपके पिताजी पं. दीनानाथ मंगेशकर की वे कौन-सी स्मृतियाँ हैं, जो आज भी आपके स्मरण में जीवित हैं?
लता मंगेशकर : कई बातें हैं। जैसे हम लोग बचपन में जब बहुत शरारत करते थे, तब पिताजी सबको बुलाकर अपने सामने खड़ा करते थे। वे बस हमको गंभीरता से देखते थे और इतने में ही हमारा रोना शुरू हो जाता था। फिर वे कहते — 'जाओ, अब मत करना।' उनकी आँखें ही काफी थीं — न डाँट, न मार।"
(1) यतींद्र मिश्र ने पहला प्रश्न किस विषय पर पूछा? (अ) पिता की यादों के बारे में (ब) संगीत करियर के बारे में (स) पुरस्कारों के बारे में
(2) पिताजी बच्चों को शरारत पर क्या करते थे? (अ) बहुत डाँटते थे (ब) गंभीरता से देखते थे (स) मारते थे
(3) 'उनकी आँखें ही काफी थीं' — इसका अर्थ है? (अ) पिताजी की गंभीर दृष्टि ही अनुशासन का काम करती थी (ब) वे हमेशा देखते रहते थे
(4) साक्षात्कार की भाषा-शैली कैसी है? (अ) कठिन (ब) सरल, आत्मीय और जीवंत (स) काव्यात्मक
(5) लता जी के किस गुण की झलक मिलती है? (अ) अहंकार (ब) पिता के प्रति गहरा प्रेम और भावुकता (स) क्रोध
(1) अ (2) ब (3) अ (4) ब (5) ब
यात्रा मनुष्य के जीवन का विस्तार है। जब हम नए स्थानों पर जाते हैं, तो हम न केवल नए भूगोल को देखते हैं, बल्कि स्वयं को भी नए दृष्टिकोण से देखते हैं। इसीलिए महान लेखकों और विचारकों ने यात्रा को आत्म-खोज का माध्यम बताया है। कन्याकुमारी भारत का दक्षिणतम बिंदु है। यहाँ तीन महासागरों का अद्भुत संगम होता है। इस संगम-स्थल पर खड़े होकर मनुष्य प्रकृति की विशालता और अपनी क्षुद्रता दोनों को एक साथ अनुभव करता है। स्वामी विवेकानंद ने यहाँ की चट्टान पर ध्यान लगाया था। उनकी यही चट्टान आज लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा का अक्षय स्रोत है।
(i) बहुविकल्पीय प्रश्न : [1×3=3 अंक]
(क) यात्रा को किसका माध्यम बताया गया है? (अ) व्यापार का (ब) आत्म-खोज का (स) आनंद का
(ख) कन्याकुमारी में कितने सागरों का संगम होता है? (अ) दो (ब) तीन (स) चार
(ग) विवेकानंद ने कन्याकुमारी में क्या किया था? (अ) पर्यटन किया (ब) तैराकी की (स) चट्टान पर ध्यान लगाकर संकल्प लिया
(ii) लघूत्तरात्मक प्रश्न : [2×2=4 अंक]
(घ) 'यात्रा मनुष्य के जीवन का विस्तार है' — इसका क्या अर्थ है?
(ङ) संगम-स्थल पर खड़े होकर मनुष्य क्या अनुभव करता है?
(क) (ब) आत्म-खोज का
(ख) (ब) तीन
(ग) (स) चट्टान पर ध्यान लगाकर संकल्प लिया
(घ) यात्रा से मनुष्य नए स्थान, लोग और दृष्टिकोण पाता है, जिससे उसका अनुभव और सोच विस्तृत होती है।
(ङ) विशाल जल-राशि को देखकर वह प्रकृति की विशालता और उसके सामने अपने छोटेपन (क्षुद्रता) का अनुभव करता है।
चल निकल यायावर मन मेरे, नए क्षितिज को छूने जा।
पहाड़ की ऊँचाई से देख, सागर की गहराई को जा।।
हर चट्टान पर कुछ लिखा है, प्रकृति का संदेश पढ़ ले।
विवेकानंद की चट्टान जैसा, संकल्प का दीप जला ले।।
(i) बहुविकल्पीय प्रश्न : [1×3=3 अंक]
(क) 'यायावर' का अर्थ है : (अ) निरंतर यात्रा करने वाला (ब) विद्यार्थी (स) किसान
(ख) 'हर चट्टान पर कुछ लिखा है' का भाव है : (अ) चट्टानों पर लिखना चाहिए (ब) प्रकृति की हर वस्तु हमें कुछ सिखाती है (स) संदेश लिखना चाहिए
(ग) 'संकल्प का दीप जला ले' किससे प्रेरणा लेने को कह रहा है? (अ) सागर की लहरों से (ब) पर्यटकों से (स) विवेकानंद की दृढ़-संकल्प साधना से
(ii) लघूत्तरात्मक प्रश्न : [2×2=4 अंक]
(घ) 'संकल्प का दीप जला ले' — इस पंक्ति का अर्थ लिखिए。
(ङ) कविता के आधार पर यात्रा के क्या लाभ हैं?
(क) (अ) निरंतर यात्रा करने वाला
(ख) (ब) प्रकृति की हर वस्तु हमें कुछ सिखाती है
(ग) (स) विवेकानंद की दृढ़-संकल्प साधना से
(घ) विवेकानंद की तरह अपने जीवन के लिए दृढ़ निश्चय करो और समाज-जागरण का संकल्प लो।
(ङ) यात्रा से नए क्षितिज दिखते हैं, प्रकृति के संदेश मिलते हैं और संकल्प-शक्ति जागृत होती है।
(i) उपसर्ग पहचानकर लिखिए : (1) विस्तार (2) प्रयाण (3) अभियान
(ii) प्रत्यय पहचानकर लिखिए : (1) पर्यटक (2) यात्री
उपसर्ग: (1) वि (2) प्र (3) अभि | प्रत्यय: (1) अक (2) ई
(1) विशाल सागर लहरा रहा था。
(2) लेखक धीरे-धीरे चला。
(3) मैंने विवेकानंद चट्टान देखी。
(4) तीन सागर यहाँ मिलते हैं。
(5) चट्टान पर बैठकर लेखक ने सोचा।
(1) गुणवाचक विशेषण (2) रीतिवाचक क्रिया-विशेषण (3) पुरुषवाचक सर्वनाम (उत्तम पुरुष) (4) संख्यावाचक विशेषण (5) अधिकरण कारक का परसर्ग
(1) लेखक कन्याकुमारी गया。
(2) वहाँ का दृश्य कितना सुंदर था!
(3) काश! मैं भी वहाँ जा सकता。
(4) जीवन में अवश्य यात्राएँ करो。
(5) यदि समय हो तो कन्याकुमारी अवश्य जाओ。
(1) विधानवाचक (2) विस्मयादिबोधक (3) इच्छावाचक (4) आज्ञावाचक (5) संकेतवाचक
(1) 'सागर मानो आकाश को छूना चाहता हो।'
(2) 'लहर लहराती लाखों बार।'
(3) 'रेत मानो सोने की चादर बिछाए हो।'
(4) 'मुख मयंक-सा सुंदर है।'
(5) 'रहिमन पानी राखिए, बिन पानी सब सून।'
(1) उत्प्रेक्षा (2) अनुप्रास (3) उत्प्रेक्षा (4) उपमा (5) श्लेष
"कन्याकुमारी। सुनहले सूर्योदय और सूर्यास्त की भूमि। केप होटल के आगे बने बाथ टैंक के बाईं तरफ, समुद्र के अंदर से उभरी स्याह चट्टानों में से एक पर खड़ा होकर मैं देर तक भारत के स्थल-भाग की आखिरी चट्टान को देखता रहा। पृष्ठभूमि में कन्याकुमारी के मंदिर की लाल और सफेद लकीरें चमक रही थीं। समुद्र की लहरें एक के बाद एक चट्टान से टकरा रही थीं।"
(1) लेखक कन्याकुमारी में कहाँ खड़ा था? (अ) मंदिर की छत पर (ब) समुद्र से उभरी स्याह चट्टानों पर (स) बाथ टैंक के ऊपर
(2) 'भारत के स्थल-भाग की आखिरी चट्टान' क्या बताती है? (अ) यह टूटने वाली है (ब) यह भारत का दक्षिणतम बिंदु है (स) यह सबसे कमज़ोर है
(3) 'स्याह' शब्द का अर्थ है? (अ) सुंदर (ब) काला (स) ऊँचा
(4) पृष्ठभूमि में क्या दिख रहा था? (अ) केवल समुद्र (ब) मंदिर की लाल-सफेद लकीरें (स) विवेकानंद स्मारक
(5) 'सुनहले सूर्योदय और सूर्यास्त की भूमि' किसे कहा गया है? (अ) कन्याकुमारी को (ब) रामेश्वरम को (स) गोवा को
(1) ब (2) ब (3) ब (4) ब (5) अ
स्त्री-शिक्षा का प्रश्न भारतीय समाज के लिए युगों से महत्त्वपूर्ण रहा है। आज़ादी के पहले जब लड़कियों को पढ़ने-लिखने का अधिकार नहीं था, तब भी सावित्रीबाई फुले जैसी महान महिलाओं ने स्त्री-शिक्षा का बीड़ा उठाया। आज लड़कियाँ विज्ञान, चिकित्सा, प्रशासन, खेल हर क्षेत्र में आगे आ रही हैं। परंतु ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी बाल-विवाह, परिवार का दबाव और संसाधनों की कमी जैसी बाधाएँ हैं। एक शिक्षित महिला न केवल स्वयं सशक्त होती है, बल्कि पूरे परिवार को सशक्त बनाती है। 'एक महिला को पढ़ाओ, एक परिवार को पढ़ाओ' — यह कथन पूर्णतः सत्य है।
(i) बहुविकल्पीय प्रश्न : [1×3=3 अंक]
(क) स्त्री-शिक्षा के लिए संघर्ष करने वाली किस महिला का उल्लेख है? (अ) लता मंगेशकर (ब) सावित्रीबाई फुले (स) झाँसी की रानी
(ख) ग्रामीण क्षेत्रों में लड़कियों की शिक्षा में क्या बाधाएँ हैं? (अ) संसाधनों की कमी और बाल-विवाह (ब) शिक्षकों की कमी (स) सरकारी नीतियाँ
(ग) 'एक महिला को पढ़ाओ, एक परिवार को पढ़ाओ' का आशय है? (अ) महिला बहुत पढ़ती है (ब) महिला की शिक्षा पूरे परिवार को लाभ पहुँचाती है (स) परिवार में एक ही पढ़े
(ii) लघूत्तरात्मक प्रश्न : [2×2=4 अंक]
(घ) आज भारत में स्त्री-शिक्षा की क्या स्थिति है?
(ङ) शिक्षित महिला परिवार और समाज को कैसे सशक्त बनाती है?
(क) (ब) सावित्रीबाई फुले
(ख) (अ) संसाधनों की कमी और बाल-विवाह
(ग) (ब) महिला की शिक्षा पूरे परिवार को लाभ पहुँचाती है
(घ) लड़कियाँ हर क्षेत्र में आगे हैं, पर ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी कुछ समस्याएँ हैं।
(ङ) वह आत्मनिर्भर बनती है, बच्चों को अच्छी शिक्षा और संस्कार देती है, जिससे पूरा परिवार आगे बढ़ता है।
बेटी नहीं बोझ है कोई, बेटी तो है घर की रोशनी।
पढ़ी-लिखी हो, आगे बढ़े वो, उसके हाथों में है हर खुशी।।
उमा-सी रीढ़ हो जिसकी, वो न झुके, न टूटे कभी।
सच बोले, सीना तानकर, दुनिया से डरे न वो कभी।।
(i) बहुविकल्पीय प्रश्न : [1×3=3 अंक]
(क) 'बेटी तो है घर की रोशनी' — यहाँ अलंकार है? (अ) उपमा (ब) यमक (स) रूपक
(ख) 'उमा-सी रीढ़' से क्या आशय है? (अ) उमा जैसी दृढ़ता और स्वाभिमान (ब) उमा की तरह कमज़ोर (स) चुप रहना
(ग) कविता का मुख्य संदेश क्या है? (अ) बेटी बोझ है (ब) बेटियाँ शिक्षित और स्वाभिमानी होनी चाहिए (स) बेटे बेहतर होते हैं
(ii) लघूत्तरात्मक प्रश्न : [2×2=4 अंक]
(घ) 'पढ़ी-लिखी हो, आगे बढ़े वो' का क्या संदेश है?
(ङ) कविता में 'उमा' का उल्लेख प्रतीकात्मक क्यों है?
(क) (स) रूपक
(ख) (अ) उमा जैसी दृढ़ता और स्वाभिमान
(ग) (ब) बेटियाँ शिक्षित और स्वाभिमानी होनी चाहिए
(घ) लड़कियों का शिक्षित होना और आत्मनिर्भर बनना समाज की प्रगति के लिए आवश्यक है।
(ङ) क्योंकि उमा एकांकी 'रीढ़ की हड्डी' की स्वाभिमानी और निडर नायिका है, जो अन्याय के आगे नहीं झुकती।
(i) उपसर्ग पहचानकर लिखिए : (1) सशक्त (2) अभिमान (3) निर्भय
(ii) प्रत्यय पहचानकर लिखिए : (1) स्त्रीत्व (2) शैक्षिक
उपसर्ग: (1) स (2) अभि (3) निर् | प्रत्यय: (1) त्व (2) इक
(1) उमा साहसी लड़की है。
(2) वह कॉलेज में पढ़ी है。
(3) उमा ने स्पष्ट कहा。
(4) रामस्वरूप बहुत घबराए。
(5) मुझे अपनी इज्जत का ख्याल है。
(1) गुणवाचक विशेषण (2) पुरुषवाचक सर्वनाम (अन्य पुरुष) (3) रीतिवाचक क्रिया-विशेषण (4) परिमाणवाचक क्रिया-विशेषण (5) पुरुषवाचक सर्वनाम (उत्तम पुरुष)
(1) उमा पढ़ी-लिखी लड़की है。
(2) क्या तुम पढ़ी-लिखी हो?
(3) काश! मैं भी उमा जैसी होती。
(4) सदा सच बोलो और सिर उठाकर जियो。
(5) यदि उमा न बोलती तो सत्य छुपा रहता。
(1) विधानवाचक (2) प्रश्नवाचक (3) इच्छावाचक (4) आज्ञावाचक (5) संकेतवाचक
(1) 'उमा की बात तीर-सी चुभी।'
(2) 'बेटी घर की रोशनी है।'
(3) 'सच सच सुनाती है उमा।'
(4) 'मुख मयंक-सा सुंदर है।'
(5) 'रहिमन पानी राखिए, बिन पानी सब सून।'
(1) उपमा (2) रूपक (3) अनुप्रास (4) उपमा (5) श्लेष
"(मामूली तरह से सजा हुआ एक कमरा। अंदर के दरवाजे से आते हुए जिन महाशय की पीठ नजर आ रही है, वे अधेड़ उम्र के मालूम होते हैं। एक तख्त को पकड़े हुए पीछे की ओर चलते-चलते कमरे में आते हैं।)
बाबू रामस्वरूप : अरे, इधर भी दो कदम बढ़ाओ। रतन को सारा बोझ मत दो।"
(1) एकांकी का आरंभ किस प्रकार के रंग-निर्देश से होता है? (अ) युद्ध के मैदान से (ब) मामूली तरह से सजे कमरे के वर्णन से (स) विद्यालय के दृश्य से
(2) बाबू रामस्वरूप कौन हैं? (अ) गोपालप्रसाद के पिता (ब) उमा के पिता (स) नाटककार
(3) 'रतन' कौन है? (अ) उनका नौकर (ब) उनका बेटा (स) पड़ोसी
(4) 'अधेड़ उम्र' का अर्थ है : (अ) बहुत बूढ़ा (ब) ढलती उम्र — न पूरा बूढ़ा न जवान (स) युवा अवस्था
(5) रंग-निर्देश (Stage Direction) का एकांकी में क्या महत्त्व होता है? (अ) केवल सजावट के लिए (ब) पात्रों, वातावरण और परिवेश की जानकारी देने के लिए (स) पाठकों को बोर करने के लिए
(1) ब (2) ब (3) अ (4) ब (5) ब
देशभक्ति केवल युद्ध में लड़ने में नहीं है। देशभक्ति का सबसे व्यापक अर्थ है — अपने देश के सम्मान की रक्षा करना, कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करना और विकास में योगदान देना। स्वामी रामतीर्थ जब जापान में थे, तो एक जापानी युवक ने उन्हें फल भेंट किए और कहा — बस इतना मूल्य चाहिए कि आप वापस जाकर यह न कहें कि जापान में अच्छे फल नहीं मिलते। हर नागरिक का कर्तव्य है कि वह अपने देश की छवि विश्व में उज्ज्वल रखे। जब हम सड़क पर गंदगी नहीं फेंकते, तब भी हम देशभक्ति करते हैं।
(i) बहुविकल्पीय प्रश्न : [1×3=3 अंक]
(क) देशभक्ति का व्यापक अर्थ क्या है? (अ) नारे लगाना (ब) देश-सम्मान की रक्षा और कर्तव्य-पालन (स) विदेश में पढ़ाई करना
(ख) जापानी युवक ने स्वामी रामतीर्थ से क्या माँगा? (अ) धन (ब) यह न कहें कि जापान में अच्छे फल नहीं मिलते (स) आशीर्वाद
(ग) 'छोटे-छोटे व्यवहार से देशभक्ति' का उदाहरण है: (अ) गंदगी न फेंकना, नियम मानना (ब) भाषण देना (स) सेना में भर्ती होना
(ii) लघूत्तरात्मक प्रश्न : [2×2=4 अंक]
(घ) जापानी युवक की कहानी से क्या सीख मिलती है?
(ङ) 'मैं और मेरा देश दो अलग नहीं हैं' — इसका क्या तात्पर्य है?
(क) (ब) देश-सम्मान की रक्षा और कर्तव्य-पालन
(ख) (ब) यह न कहें कि जापान में अच्छे फल नहीं मिलते
(ग) (अ) गंदगी न फेंकना, नियम मानना
(घ) एक सामान्य नागरिक भी छोटे-से काम से देश का सम्मान विश्व में बढ़ा सकता है।
(ङ) व्यक्ति का सम्मान देश का सम्मान है, और देश की प्रतिष्ठा में नागरिक का सीधा योगदान होता है।
जो देश को माँ मानता है, वही सच्चा देशभक्त है।
छोटे कार्यों से भी करता, वो देश का सम्मान रखत है।।
लाला लाजपत राय जैसा, गौरव भारत का करो।
झंडा ऊँचा रखो सदा, हर काम में देश को धरो।।
(i) बहुविकल्पीय प्रश्न : [1×3=3 अंक]
(क) 'देश को माँ मानना' किस भाव का प्रतीक है? (अ) आदर और प्रगाढ़ प्रेम का (ब) भय का (स) उदासीनता का
(ख) लाला लाजपत राय का उल्लेख क्यों किया गया है? (अ) वे कवि थे (ब) वे देशभक्ति और राष्ट्र-गौरव के प्रतीक हैं (स) वे शिक्षाविद् थे
(ग) 'हर काम में देश को धरो' का संदेश है: (अ) प्रत्येक कार्य में देश का हित सोचो (ब) सरकारी काम करो (स) युद्ध करो
(ii) लघूत्तरात्मक प्रश्न : [2×2=4 अंक]
(घ) 'झंडा ऊँचा रखो सदा' — इस पंक्ति का आशय लिखिए。
(ङ) कविता में 'सच्चे देशभक्त' की क्या परिभाषा दी गई है?
(क) (अ) आदर और प्रगाढ़ प्रेम का
(ख) (ब) वे देशभक्ति और राष्ट्र-गौरव के प्रतीक हैं
(ग) (अ) प्रत्येक कार्य में देश का हित सोचो
(घ) देश की प्रतिष्ठा और गरिमा को सदैव ऊँचा रखो, उसे कभी नीचा न होने दो।
(ङ) जो देश को माँ मानकर उसका सम्मान करे और हर छोटे-बड़े काम में देश का हित सोचे।
(i) उपसर्ग पहचानकर लिखिए : (1) प्रतिष्ठा (2) अभिमान (3) सुपुत्र
(ii) प्रत्यय पहचानकर लिखिए : (1) नागरिकता (2) देशीय
उपसर्ग: (1) प्रति (2) अभि (3) सु | प्रत्यय: (1) ता (2) ईय
(1) लाला लाजपत राय महान देशभक्त थे。
(2) मैं अपने देश का नागरिक हूँ。
(3) देश का सम्मान सदा रखो。
(4) हम सब देश के नागरिक हैं。
(5) जापानी युवक ने फल भेंट किए。
(1) गुणवाचक विशेषण (2) पुरुषवाचक सर्वनाम (3) कालवाचक क्रिया-विशेषण (4) पुरुषवाचक सर्वनाम (बहुवचन) (5) गुणवाचक विशेषण
(1) मैंने देश की सेवा की。
(2) क्या तुम देश से प्रेम करते हो?
(3) काश! हमारा देश उन्नत हो。
(4) देश का सम्मान सदा करते रहो。
(5) यदि नागरिक ईमानदार हों तो देश महान बनता है。
(1) विधानवाचक (2) प्रश्नवाचक (3) इच्छावाचक (4) आज्ञावाचक (5) संकेतवाचक
(1) 'भारत माता की जय।'
(2) 'देश माँ की तरह पालती है।'
(3) 'कनक कनक ते सौ गुनी।'
(4) 'चारू चंद्र की चंचल किरणें।'
(5) 'रहिमन पानी राखिए।'
(1) मानवीकरण (2) उपमा (3) यमक (4) अनुप्रास (5) श्लेष
"हमारे देश के महान संत स्वामी रामतीर्थ एक बार जापान गए। वे रेल में यात्रा कर रहे थे कि एक दिन ऐसा हुआ कि उन्हें खाने को फल न मिले... उनके मुँह से निकला — 'जापान में शायद अच्छे फल नहीं मिलते।' एक जापानी युवक प्लेटफार्म पर खड़ा था। उसने यह सुन लिया। वह दौड़ा और कहीं दूर से टोकरी भर ताजे फल ले आया।"
(1) स्वामी रामतीर्थ किस देश की यात्रा पर थे? (अ) चीन (ब) अमेरिका (स) जापान
(2) स्वामी जी को क्या कठिनाई हुई? (अ) खाने को फल नहीं मिले (ब) भाषा की समस्या थी (स) रेल नहीं मिली
(3) जापानी युवक ने फल लाने के बाद क्या माँगा? (अ) धन (ब) वापस जाकर यह न कहें कि जापान में फल नहीं मिलते (स) कुछ नहीं
(4) इस घटना से क्या पाठ मिलता है? (अ) नागरिक छोटे कार्यों से देश का सम्मान बढ़ा सकता है (ब) विदेश नहीं जाना चाहिए (स) फल खाने चाहिए
(5) यह घटना किस बात का प्रमाण है? (अ) जापानी युवक की मूर्खता का (ब) जापानी युवक की सच्ची देशभक्ति का (स) भारत की गरीबी का
(1) स (2) अ (3) ब (4) अ (5) ब
भक्ति का अर्थ है — ईश्वर के प्रति अटूट प्रेम और समर्पण। भारतीय संत-परंपरा में भक्ति को ज्ञान और कर्म से भी श्रेष्ठ माना गया है। भक्तिकाल के संतों ने जाति, वर्ग और सामाजिक भेद से ऊपर उठकर ईश्वर के साथ सीधा संबंध स्थापित किया। रैदास मोची थे, कबीर जुलाहे — पर उनकी भक्ति इतनी प्रगाढ़ थी कि उन्हें महान संत माना गया। सच्ची भक्ति में आडंबर की कोई जगह नहीं। 'मन, क्रम और वचन' — तीनों स्तरों पर ईश्वर के प्रति समर्पण ही सच्ची भक्ति है।
(i) बहुविकल्पीय प्रश्न : [1×3=3 अंक]
(क) भक्तिकाल के संतों ने क्या सिद्ध किया? (अ) भक्ति के मार्ग में जाति-वर्ग कोई बाधा नहीं (ब) जाति ही ईश्वर-प्राप्ति का माध्यम है (स) तीर्थ ही मोक्ष देते हैं
(ख) 'सच्ची भक्ति में आडंबर की जगह नहीं' — इसका आशय है: (अ) बाहरी अनुष्ठान अनिवार्य हैं (ब) हृदय की शुद्ध भावना ही असली भक्ति है (स) मंदिर जाना जरूरी है
(ग) 'मन, क्रम और वचन' का क्या महत्त्व है? (अ) केवल वचन से भक्ति होती है (ब) केवल कर्म से मोक्ष मिलता है (स) तीनों स्तरों पर ईश्वर-समर्पण ही सच्ची भक्ति है
(ii) लघूत्तरात्मक प्रश्न : [2×2=4 अंक]
(घ) रैदास और कबीर का उदाहरण देकर बताइए कि भक्ति के लिए क्या आवश्यक है?
(ङ) गद्यांश के अनुसार भक्तिकाल की विशेषता क्या थी?
(क) (अ) भक्ति के मार्ग में जाति-वर्ग कोई बाधा नहीं
(ख) (ब) हृदय की शुद्ध भावना ही असली भक्ति है
(ग) (स) तीनों स्तरों पर ईश्वर-समर्पण ही सच्ची भक्ति है
(घ) भक्ति के लिए उच्च जाति या विद्वत्ता नहीं, केवल हृदय की शुद्ध श्रद्धा और समर्पण आवश्यक है।
(ङ) भक्तिकाल में जाति-वर्ग से ऊपर उठकर ईश्वर से सीधा संबंध स्थापित किया गया और मन-वचन-कर्म की एकता को महत्त्व दिया गया।
जिसने मन से राम जपा है, उसको कोई दुख न व्यापा है।
चंदन-सा महके उसका जीवन, दीपक-सा जो जले सदा।।
भेद नहीं कुछ ऊँच-नीच का, सबके मन में वही बसा है।
रैदास कहें — जो हरि को जाने, वही जगत में सुखी हुआ है।।
(i) बहुविकल्पीय प्रश्न : [1×3=3 अंक]
(क) 'चंदन-सा महके उसका जीवन' — यहाँ अलंकार है? (अ) यमक (ब) उपमा (स) श्लेष
(ख) 'दीपक-सा जो जले सदा' का भाव है? (अ) दीपक जलाना जरूरी है (ब) जो दूसरों के लिए प्रकाश फैलाए और निस्वार्थ जिए (स) छोटे दीपक कमज़ोर होते हैं
(ग) 'भेद नहीं कुछ ऊँच-नीच का' का संदेश है? (अ) ईश्वर के यहाँ कोई जाति-भेद नहीं है (ब) धन से सुख मिलता है (स) समाज में भेद होना चाहिए
(ii) लघूत्तरात्मक प्रश्न : [2×2=4 अंक]
(घ) 'वही जगत में सुखी हुआ है' — कवि ने किसे सुखी माना है?
(ङ) कविता में भक्त और भगवान के रिश्ते को कैसे दर्शाया गया है?
(क) (ब) उपमा
(ख) (ब) जो दूसरों के लिए प्रकाश फैलाए और निस्वार्थ जिए
(ग) (अ) ईश्वर के यहाँ कोई जाति-भेद नहीं है
(घ) कवि ने उसे सुखी माना है जो मन से हरि (ईश्वर) को जानता और जपता है।
(ङ) भक्त और भगवान का रिश्ता अटूट, स्नेहमय और ऊँच-नीच के भेदभाव से मुक्त दर्शाया गया है।
(i) उपसर्ग पहचानकर लिखिए : (1) अनन्य (2) समर्पण (3) प्रभु
(ii) प्रत्यय पहचानकर लिखिए : (1) भक्ति (2) रैदासा
उपसर्ग: (1) अन् (2) सम् (3) प्र | प्रत्यय: (1) ति (2) आ
(1) रैदास महान संत थे。
(2) तुम स्वामी, हम दासा。
(3) दीपक की जोति दिन-रात जलती है。
(4) मन क्रम वचन से भक्ति करो。
(5) प्रभुजी तुम चंदन हम पानी。
(1) गुणवाचक विशेषण (2) पुरुषवाचक सर्वनाम (उत्तम पुरुष) (3) कालवाचक क्रिया-विशेषण (4) जातिवाचक संज्ञा (5) पुरुषवाचक सर्वनाम
(1) रैदास ने ईश्वर की भक्ति की。
(2) क्या तुम राम का नाम जपते हो?
(3) काश! मेरा मन प्रभु में लग जाए。
(4) सदा ईश्वर का स्मरण करते रहो。
(5) यदि मन शुद्ध हो तो ईश्वर मिलते हैं。
(1) विधानवाचक (2) प्रश्नवाचक (3) इच्छावाचक (4) आज्ञावाचक (5) संकेतवाचक
(1) 'प्रभुजी तुम चंदन हम पानी।'
(2) 'चितवत चंद चकोरा।'
(3) 'तुम दीपक, हम बाती।'
(4) 'कनक कनक ते सौ गुनी।'
(5) 'रहिमन पानी राखिए।'
(1) रूपक / उपमा (2) अनुप्रास (3) रूपक (4) यमक (5) श्लेष
"अब कैसे छूटै राम रट लागी।
प्रभुजी तुम चंदन हम पानी, जाकी अंग-अंग बास समानी।
प्रभुजी तुम घन बन, हम मोरा, जैसे चितवत चंद चकोरा।
प्रभुजी तुम दीपक, हम बाती, जाकी जोति बरै दिन राती।
प्रभुजी तुम मोती, हम धागा, जैसे सोने मिलत सुहागा।"
(1) 'अब कैसे छूटै राम रट लागी' का भाव है? (अ) राम-नाम रटना कठिन है (ब) आराध्य का नाम मन में रच-बस गया है, छूट नहीं सकता (स) राम का नाम याद नहीं आता
(2) 'चंदन-पानी' में भक्त और आराध्य का संबंध कैसा है? (अ) एकाकार और समरूप (ब) दूर का (स) आश्रय और आश्रित
(3) 'तुम दीपक, हम बाती' में अलंकार है? (अ) अनुप्रास (ब) यमक (स) रूपक
(4) 'जैसे सोने मिलत सुहागा' में सुहागा का क्या महत्त्व है? (अ) सुहागा सोने की अशुद्धियाँ दूर कर उसे चमकाता है (ब) सुहागा सोने से महंगा है (स) दोनों एक हैं
(5) 'जैसे चितवत चंद चकोरा' का क्या अर्थ है? (अ) चकोर चाँद को निहारता है (ब) मोर नाचता है (स) दीपक जलता है
(1) ब (2) अ (3) स (4) अ (5) अ
क्रोध मानव का सबसे बड़ा शत्रु है। जब मनुष्य क्रोध में होता है, तो वह सोचने-समझने की शक्ति खो देता है। परंतु जो व्यक्ति क्रोध में भी विवेक नहीं खोता, वह सच्चा वीर है। विनम्रता एक ऐसा गुण है जो क्रोधी व्यक्ति को भी शांत कर सकती है। तुलसीदास के रामचरितमानस में राम का विनम्र स्वभाव इसी सत्य को प्रमाणित करता है। एक कुशल शासक में तीन गुण अनिवार्य हैं — पहला: धैर्य, दूसरा: विनम्रता और तीसरा: विवेक। संकट की घड़ी में यही संतुलन नेतृत्व की कसौटी होती है।
(i) बहुविकल्पीय प्रश्न : [1×3=3 अंक]
(क) एक कुशल शासक के लिए कौन-से तीन गुण अनिवार्य हैं? (अ) शक्ति, धन, सेना (ब) धैर्य, विनम्रता और विवेक (स) युद्ध-कला, साहस, बुद्धि
(ख) 'क्रोध में भी विवेक न खोना' क्या है? (अ) कायरता (ब) सच्चे वीर का गुण (स) कमज़ोरी
(ग) राम और लक्ष्मण में मुख्य अंतर क्या बताया गया है? (अ) राम कमज़ोर हैं (ब) राम का भावनात्मक संतुलन लक्ष्मण के उग्र साहस से श्रेष्ठ है (स) लक्ष्मण शांत हैं
(ii) लघूत्तरात्मक प्रश्न : [2×2=4 अंक]
(घ) 'विनम्रता से क्रोधी भी शांत हो जाता है' — राम के उदाहरण से समझाइए。
(ङ) संकट की घड़ी में नेतृत्व की कसौटी क्या है?
(क) (ब) धैर्य, विनम्रता और विवेक
(ख) (ब) सच्चे वीर का गुण
(ग) (ब) राम का भावनात्मक संतुलन लक्ष्मण के उग्र साहस से श्रेष्ठ है
(घ) परशुराम के अत्यंत क्रोधित होने पर भी राम ने विनम्रता से बात की, जिससे अंततः उनका क्रोध शांत हो गया।
(ङ) संकट में उत्तेजित न होना और भावनात्मक संतुलन (धैर्य और विवेक) बनाए रखना ही नेतृत्व की सच्ची कसौटी है।
धीर वही जो शांत रहे, जब चारों ओर हो अंधियारा।
राम-सा मन हो जिसका, उसको क्या है दुनिया का डर।।
क्रोध न करे, धनुष न तोड़े, बोले मीठे बोल सदा।
संकट में जो डरे नहीं, सच बोले बिना रुके। वही योद्धा, वही वीर है, जो विनम्र हो फिर भी।।
(i) बहुविकल्पीय प्रश्न : [1×3=3 अंक]
(क) 'राम-सा मन हो जिसका' — इसमें राम किसके प्रतीक हैं? (अ) युद्ध-कौशल के (ब) धैर्य, विनम्रता और भावनात्मक संतुलन के (स) वन-यात्रा के
(ख) आदर्श योद्धा की पहचान क्या है? (अ) केवल साहस (ब) संकट में निडर, सच्चा और विनम्र (स) जो सबको डराए
(ग) 'बोले मीठे बोल सदा' में अलंकार है? (अ) यमक (ब) श्लेष (स) अनुप्रास
(ii) लघूत्तरात्मक प्रश्न : [2×2=4 अंक]
(घ) 'धीर वही जो शांत रहे' — इसका भाव लिखिए。
(ङ) साहस के साथ-साथ क्या आवश्यक है?
(क) (ब) धैर्य, विनम्रता और भावनात्मक संतुलन के
(ख) (ब) संकट में निडर, सच्चा और विनम्र
(ग) (स) अनुप्रास
(घ) सच्चा धैर्यवान वह है जो कठिन परिस्थितियों में भी अपना मानसिक संतुलन न खोए।
(ङ) साहस के साथ-साथ विनम्रता और विवेक भी अत्यंत आवश्यक है।
(i) उपसर्ग पहचानकर लिखिए : (1) प्रतिरोध (2) विनम्र (3) अपमान
(ii) प्रत्यय पहचानकर लिखिए : (1) विनम्रता (2) क्रोधी
उपसर्ग: (1) प्रति (2) वि (3) अप | प्रत्यय: (1) ता (2) ई
(1) राम विनम्र राजकुमार थे。
(2) परशुराम अत्यंत क्रोधित हुए。
(3) लक्ष्मण ने उत्तर दिया。
(4) वे सभा में आए。
(5) सभी राजा भयभीत हो गए。
(1) गुणवाचक विशेषण (2) परिमाणवाचक क्रिया-विशेषण (3) व्यक्तिवाचक संज्ञा (4) पुरुषवाचक सर्वनाम (5) अनिश्चयवाचक विशेषण
(1) राम ने प्रणाम किया。
(2) क्या तुमने धनुष तोड़ा?
(3) अरे! इतना क्रोध क्यों?
(4) काश! क्रोध शांत हो जाता。
(5) यदि राम विनम्र न होते तो संघर्ष होता。
(1) विधानवाचक (2) प्रश्नवाचक (3) विस्मयादिबोधक (4) इच्छावाचक (5) संकेतवाचक
(1) 'अरि करनी करि करिअ लराई।'
(2) 'पद सरोज मेले दोउ भाई।'
(3) 'अरध निमेष कलप सम बीता।'
(4) 'मुख मयंक-सा सुंदर है।'
(5) 'रहिमन पानी राखिए।'
(1) अनुप्रास (2) रूपक (3) अतिशयोक्ति / उपमा (4) उपमा (5) श्लेष
"अति रिस बोले बचन कठोरा। कहु जड़ जनक धनुष कै तोरा॥
बेगि देखाउ मूढ़ न त आजू। उलटउँ महि जहँ लहि तव राजू॥
अति डरु उतरु देत नृप नाहीं। कुटिल भूप हरषे मन माहीं॥"
(1) परशुराम के क्रोध का क्या कारण था? (अ) सीता स्वयंवर (ब) शिव-धनुष का टूटना (स) लक्ष्मण का हँसना
(2) 'जड़ जनक' कहकर परशुराम ने क्या धमकी दी? (अ) राज्य उलटने (नष्ट करने) की (ब) महल तोड़ने की (स) सेना बुलाने की
(3) 'कुटिल भूप हरषे मन माहीं' — कुटिल राजा क्यों खुश हो रहे थे? (अ) वे धनुष नहीं तोड़ पाए थे, अब राम-लक्ष्मण को संकट में देखकर खुश थे (ब) वे राम के मित्र थे (स) वे परशुराम से डरते नहीं थे
(4) 'रिस' का अर्थ क्या है? (अ) खुशी (ब) क्रोध (स) दुख
(5) यह काव्यांश किस भाषा में रचित है? (अ) ब्रज (ब) अवधी (स) संस्कृत
(1) ब (2) अ (3) अ (4) ब (5) ब
भारत की भूमि विविधताओं से भरी है। यहाँ पर्वत हैं, नदियाँ हैं, मैदान हैं, समुद्र हैं। भारत के उत्तर में हिमालय मुकुट की तरह खड़ा है, दक्षिण में तीन सागर पाद-प्रक्षालन करते हैं। परंतु भारत की असली पहचान केवल उसकी प्रकृति में नहीं है। इसकी पहचान है — इसकी सांस्कृतिक विविधता में। अनेक भाषाएँ, अनेक धर्म, अनेक परंपराएँ — फिर भी एक राष्ट्र, एक भावना। 'अनेकता में एकता' — यही भारत की आत्मा है। स्वतंत्रता से पहले कवियों ने अपनी लेखनी से जन-जन में देशप्रेम जगाया। निराला, माखनलाल चतुर्वेदी — इन सबने भारत-माँ की स्तुति करके लोगों में आज़ादी की आग जलाई।
(i) बहुविकल्पीय प्रश्न : [1×3=3 अंक]
(क) भारत के उत्तर में क्या स्थित है? (अ) समुद्र (ब) हिमालय — मुकुट की तरह (स) गंगा
(ख) 'अनेकता में एकता' भारत की क्या है? (अ) कमज़ोरी (ब) भारत की आत्मा और असली पहचान (स) समस्या
(ग) कवियों ने अपनी लेखनी से क्या किया? (अ) जन-जन में देशप्रेम जगाया (ब) मनोरंजन किया (स) विदेशी प्रशंसा
(ii) लघूत्तरात्मक प्रश्न : [2×2=4 अंक]
(घ) 'भारत की असली पहचान प्रकृति में नहीं' — तो कहाँ है?
(ङ) स्वतंत्रता-संग्राम में कवियों की क्या भूमिका रही?
(क) (ब) हिमालय — मुकुट की तरह
(ख) (ब) भारत की आत्मा और असली पहचान
(ग) (अ) जन-जन में देशप्रेम जगाया
(घ) असली पहचान उसकी सांस्कृतिक विविधता और अनेकता में एकता में है।
(ङ) कवियों ने भारत-माँ की स्तुति कर लोगों के दिलों में आज़ादी और देशभक्ति की आग जलाई।
माँ, तेरा आँचल है हरा-भरा, नदियाँ तेरी जीवन धारा。
हिम-मुकुट से श्रेष्ठ तू, सागर-तल से गहरी तू।।
गंगा-यमुना तेरे गहने, हिमालय तेरा मुकुट सुनहरे。
देश मेरा, माँ तू मेरी, प्राण न्योछावर, शान तेरी।।
(i) बहुविकल्पीय प्रश्न : [1×3=3 अंक]
(क) 'हे भारत माँ! जय हो तेरी' में भारत को क्या माना गया है? (अ) केवल देश (ब) माँ के रूप में (स) नदी
(ख) 'गंगा-यमुना तेरे गहने' में अलंकार है? (अ) उपमा (ब) यमक (स) रूपक
(ग) कविता का मुख्य भाव है? (अ) नदियों का वर्णन (ब) भारत माँ की स्तुति और देशप्रेम (स) पर्वतारोहण
(ii) लघूत्तरात्मक प्रश्न : [2×2=4 अंक]
(घ) 'प्राण न्योछावर, शान तेरी' का भाव स्पष्ट कीजिए。
(ङ) प्रकृति का वर्णन देशभक्ति को कैसे व्यक्त करता है?
(क) (ब) माँ के रूप में
(ख) (स) रूपक
(ग) (ब) भारत माँ की स्तुति और देशप्रेम
(घ) मैं अपने प्राण न्योछावर कर दूँगा, पर देश की शान और गौरव को आँच नहीं आने दूँगा।
(ङ) भारत की प्राकृतिक समृद्धि (हरियाली, नदियाँ, हिमालय) को माँ के स्वरूप से जोड़कर देशभक्ति को गहरा किया गया है।
(i) उपसर्ग पहचानकर लिखिए : (1) विजय (2) प्रणव (3) उदार
(ii) प्रत्यय पहचानकर लिखिए : (1) भारती (2) मुखर
उपसर्ग: (1) वि (2) प्र (3) उ / उत् | प्रत्यय: (1) ई (2) र
(1) भारत की भूमि पवित्र है。
(2) गंगा ज्योतिर्जल-कण धार है。
(3) दिशाएँ ध्वनित हो रही हैं。
(4) हिमालय का मुकुट सफेद है。
(5) हम सब भारतवासी हैं。
(1) गुणवाचक विशेषण (2) व्यक्तिवाचक संज्ञा (3) जातिवाचक संज्ञा (4) गुणवाचक विशेषण (5) पुरुषवाचक सर्वनाम
(1) भारत माँ की जय हो。
(2) क्या भूमि पवित्र नहीं?
(3) वाह! हिमालय कितना भव्य है!
(4) सदा स्मरण करते रहो。
(5) यदि प्रकृति न हो तो जीवन असंभव है。
(1) इच्छावाचक (2) प्रश्नवाचक (3) विस्मयादिबोधक (4) आज्ञावाचक (5) संकेतवाचक
(1) 'मुकुट शुभ्र हिम-तुषार।'
(2) 'धवल धार हार गले।'
(3) 'शतमुख-शतरव-मुखरे!'
(4) 'मुख मयंक-सा सुंदर है।'
(5) 'कनक कनक ते सौ गुनी।'
(1) रूपक (2) अनुप्रास (3) अनुप्रास (4) उपमा (5) यमक
"भारति, जय, विजयकरे!
कनक-शस्य-कमलधरे!
लंका पदतल शतदल, गर्जितोर्मि सागर-जल
धोता शुचि चरण युगल
... गंगा ज्योतिर्जल-कण
धवल धार हार गले।"
(1) 'कनक-शस्य-कमलधरे' का भाव है? (अ) भारत सोने जैसी फसलों और कमल वाली समृद्ध भूमि है (ब) भारत में केवल कमल होता है (स) भारत में सोना मिलता है
(2) समुद्र क्या धोता है? (अ) लंका को (ब) भारत माँ के पवित्र चरणों को (स) हिमालय को
(3) गंगा को क्या बताया गया है? (अ) नदियाँ (ब) भारत माँ के गले का धवल हार (स) समुद्र का हिस्सा
(4) 'मुकुट शुभ्र हिम-तुषार' में कौन-सा अलंकार है? (अ) उपमा (ब) रूपक (स) यमक
(5) 'भारति' का यहाँ क्या अर्थ है? (अ) सरस्वती या भारत माता (ब) भारत का एक राज्य (स) भाषा
(1) अ (2) ब (3) ब (4) ब (5) अ